Why Females Are Not Allowed In Temples During Periods Scientific Reason In Hindi

नमस्कार दोस्तों. कैसे हैं आप? आज हम बात करने वाले हैं कि आखिर क्यूँ (Why Females Are Not Allowed In Temples During Periods Scientific Reason In Hindi) भारत में महिलाओं को उनके मासिक धर्म के दौरान मंदिरों में जाने से रोका जाता है। आखिर क्या कारण है, कि स्त्रियों का इतना सम्मान देने वाली सभ्यता में, स्त्रियों को मंदिरों में जाने से रोका जाता है। पूजा करने से रोका जाता है, उन्हे घर के किचन में कार्य करने से रोका जाता है। इसके पीछे आखिर क्या कारण है? क्या कोई वैज्ञानिक आधार है या फिर अन्य कोई कारण है। अक्सर आपने अपने घर में ऐसा होते देखा होगा लेकिन क्या कभी आपने सोचा कि इस प्रथा के पीछे या इस नियम के पीछे वास्तविक कारण क्या हो सकता है। हम कई बार अपने आस पास चीजों को घटता हुआ देखते है लेकिन जब कोई हमसे उस प्रथा के बारे में प्रश्न करता है। वो घटनाएं क्यों हो रही है? ऐसी प्रथाएँ क्यों बनी है? उसको हम सही तरीके से कभी एक्सप्लेन नहीं कर पाते हैं, उसका सही उत्तर नहीं दे पाते है। तो आज आपको वो सही उत्तर मिलने वाला है जिससे आपको ज्ञात होगा कि आखिर क्यों भारतीय मंदिरों में सनातन पद्धति में महिलाओं को मासिक चक्र के दौरान उन्हें मंदिरों में प्रवेश करने से रोका जाता है।

What will happen if we go to temple during periods scientific reason

मासिक चक्र को कई नामों से जाना जाता है। जैसे – मासिक धर्म, महिना, महावरी, Periods और Menstruation Cycle आदि। भारतीय महिलाओं को उनकी 10 से 13 वर्ष की आयु मासिक चक्र आना प्रारंभ होते है, और ये सामन्यतः महिला की 40 से 48 उम्र तक नियमित आते है। । ये मासिक चक्र जितना समय से आते हैं महिला के शरीर के मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ होने की संभावना उतनी अधिक रहती है। इसके अलावा मासिक चक्र महिला के माँ बन सकने की पहली शर्त को भी पूरा करते है। महिला के जीवन काल में मासिक चक्र तभी रुकते है जब या तो महिला गर्भवती हो या फिर मानसिक या शारीरिक रूप से वो अस्वस्थ हो।

हमारा शरीर पूर्ण रूप से ऊर्जा से कार्यान्वित होता है। शरीर के हर कार्य को करने में ऊर्जा खर्च होती है। तो जब महिला का शरीर मासिक धर्म या Periods से गुजर रहा होता है तो उसके शरीर की ऊर्जा का प्रवाह ऊपर से नीचे की ओर होता है जिसे आयुर्वेद में अपान वायु के नाम से भी जाना जाता है। जिस महिला के शरीर में ऊर्जा का प्रवाह ऊपर से नीचे की ओर जितने ज्यादा अच्छे तरीके से होगा उस महिला को Periods में उतनी कम तकलीफ होगी और उसके मासिक धर्म का मल या तरल Fluid आसानी से बाहर की ओर प्रवाहित होगा। तो मासिक धर्म के दौरान शरीर की ऊर्जा का प्रवाह का ऊपर से नीचे की ओर होना परमावश्यक है।

भारत में जीतने भी प्राचीन हिन्दू मंदिर है जो सनातन पद्धति के द्वारा निर्मित हुए हैं। उन सभी में एक गर्भ गृह होता है। और यह गर्भ गृह मंदिर की ऊर्जा का केंद्र होता है जो भी व्यक्ति प्राचीन मंदिरों मे जाता है वहाँ पर उस ऊर्जा को अनुभव करता है। आपने अगर कभी ध्यान नहीं दिया हो तो अगली बार जाकर देखना जब आप मंदिर के गर्भ गृह से बाहर निकलेंगे तो आप स्वयं को पहले से अधिक तरो ताजा महसूस करेगे आप एक नई तरह की शांति को महसूस करेगे। ये जो ताजगी और शांति हमें मंदिर जाकर प्राप्त होती है उसका एक मूल कारण हमारे शरीर में ऊर्जा का प्रवाह नीचे से ऊपर की ओर होना है। तो अगर कोई मासिक चक्र से गुजर रही महिला किसी मंदिर में जाएगी तो उसकी ऊर्जा के प्रवाह में परिवर्तन आएगा जो कि उसके मासिक चक्र के लिए उचित नही होगा। इसिलिय हिंदू मंदिरों मे Periods के दौरान महिलाओं का मंदिरों में प्रवेश करना अनुचित माना जाता है।

What happens if we do pooja during periods

जब हम भगवान की पूजा कर रहे होते हैं, तो ऐसी स्थिति में हमारा ध्यान हमारे मस्तिष्क में स्थित आज्ञा चक्र की ओर होता है। और जब पूजा के दौरान हमारा ध्यान मस्तिष्क की ओर जाता है तो ऐसी स्थिति में हमारे शरीर की ऊर्जा का प्रवाह नीचे से ऊपर की ओर होने लगता है। जो कि किसी भी मासिक धर्म या Periods से गुजरने वाली स्त्री के लिए सही स्थिति नहीं है क्यूंकी Periods के दौरान ऊर्जा का प्रवाह ऊपर से नीचे की ओर होना अति आवश्यक है। यही कारण है जिसकी बजह से हिंदू धर्म में स्त्रियों को मासिक चक्र (Periods) के दौरान पूजा करने का निषेध है।

किसी रजस्वला स्त्री(menstruating woman) के स्पर्श करने से भगवान शुद्ध या अशुद्ध नहीं होते हैं। वल्की मासिक चक्र के दौरान पूजा करने या मंदिर जाने से रजस्वला स्त्री(menstruating woman) की शारीरिक ऊर्जा के प्रवाह में व्यवधान उत्पन्न हो सकता है, जिसके कारण उसे कई रोग हो सकते हैं और मासिक धर्म के दौरान उस स्त्री की कठिनाइयाँ और बढ़ सकती हैं। इन सब को ध्यान में रखकर सैकड़ों वर्ष पूर्व हमारे पूर्वजों ने स्त्रियों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए ऐसी प्रथाएं और नियम बनाए।

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