Arvind Kejriwal Arrested – क्या अरविंद केजरीवाल को जेल भेजने में कांग्रेस का हाँथ है?

अरविंद केजरीवाल के द्वारा शराब नीति के द्वारा भृष्टाचार की सबसे पहली शिकायत कांग्रेस के नेताओं ने जून 2022 में दिल्ली पुलिस से की थी।

उसके बाद 2023 में अरविंद केजरीवाल को भृष्टाचार करने के लिए इस्तीफा देने की मांग कांग्रेस के नेताओं ने ही की थी।

और कल जब अरविंद केजरीवाल को शराब नीति के द्वारा भ्रष्टाचार के लिए गिरफ्तार कर लिया गया। तो राहुल गांधी केजरीवाल के साथ खड़े हो गए। जबकि हकीकत कुछ और ही है।

कांग्रेस के किसी नेता ने ED के सम्मन स्किप नहीं किये लेकिन कांग्रेस के वकीलों की सलाह पर केजरीवाल ने ED के सभी सम्मन स्किप किये। राहुल गांधी, सोनिया गांधी या प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट बाड्रा सभी ED के बुलाने पर हर बार गए। लेकिन अरविंद केजरीवाल ने लगातार 9 सम्मन को स्किप किया।

ये सभी घटनाक्रम देखकर प्रतीत होता है कि कांग्रेस चाहती है केजरीवाल जेल में रहे जिससे उसे पंजाब में फायदा हो। अरविंद केजरीवाल की पार्टी दो जगह सबसे ज्यादा मजबूत है एक दिल्ली और दूसरा पंजाब। इन दोनों जगह पर अरविंद केजरीवाल के जेल जाने से भाजपा को कुछ फायदा नहीं होगा लेकिन पंजाब की 13 सीटों पर कांग्रेस को एकतरफा फायदा देखने को मिल सकता है।

राजनीति की क्रोनोलॉजी को समझ पाना इतना आसान नहीं है। कांग्रेस के प्रवक्ता अलका लांबा हो या सुप्रिया श्रीनेत सभी ने अरविंद केजरीवाल पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कई आरोप लगाए थे।

कांग्रेस की पूर्व सरकार में मंत्री रहे अजय माकन ने भी अरविंद केजरीवाल पर भ्रष्टाचार के बड़े आरोप लगाकर इस्तीफा देने की मांग की थी। लेकिन सत्ता में कोई किसी का परमानेंट साथी नहीं होता। शायद यही बात समझनी बड़ी मुश्किल है किसी आम इंसान के लिए।

अरविंद केजरीवाल के जेल जाने से सबसे ज्यादा अगर किसी को फायदा होगा वो राहुल गांधी और कांग्रेस की पार्टी है।

राजनीति में दूर से जो दिखाया जा रहा होता है वो कई बार सही नहीं होता है। कांग्रेस भी अरविंद केजरीवाल के साथ क्रॉस गेम खेल रही है। और कोर्ट में जो वकील अरविंद केजरीवाल के पक्ष में दलीलें देते हैं वो सभी कांग्रेसी नेता ही है। ऐसे में आम आदमी के पार्टी के किसी भी नेता को जमानत न मिलना, काफी सवाल खड़े करता है।

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