भारतीय न्याय (दूसरी) सहिंता 2023- अध्याय 5 – महिला और बालक के विरुद्ध अपराधों के विषय में

भारतीय न्याय (द्वितीय) सहिंता 2023 को राष्ट्रपति के द्वारा मंजूरी मिल गयी है। अब यह सम्पूर्ण भारत में कानून के रूप में स्थापित हो चुकी है। इस कानून में महिलाओं और बालकों से जुड़े अपराधों पर विशेष ध्यान स्थापित किया गया है। जिससे समाज में महिलाओं और बालकों के लिए एक सुरक्षित वातावरण स्थापित किया जा सके। और महिलाओं से जुड़े अपराधों के मामलों में कठोर कार्यवाही की जा सके।

अध्याय 5 – महिला और बालक के विरुद्ध अपराधों के विषय में

भारतीय न्याय द्वितीय सहिंता 2023 के अध्याय 5 में महिलाओं और बालकों से जुड़े अपराधों का वर्णन है। जिसका विवरण खंड 63 से 99 तक दिया गया है। महिला और बालकों के विरुद्ध अपराधों को भारतीय न्याय (दूसरी) सहिंता 2023 में 5 भागों में बाँटा गया है।

  • लैंगिक अपराधों के विषय में
  • महिला के विरुद्ध आपराधिक बल और हमले के विषय में
  • विवाह से संबंधित अपराधों के विषय में
  • गर्भपात, आदि कारित करने के विषय में
  • बालक के विरुद्ध अपराधों के विषय में

लैंगिक अपराधों के विषय में

भारतीय न्याय (दूसरी) सहिंता 2023 खंड 63 से 73 तक लैंगिक अपराधों के विषय में प्रावधान किए गए हैं। इन खंडों मे लिंग आधारित उत्पीड़न के लिए दंड का प्रावधान किया गया है।

63.बलात्संग ।
64.बलात्संग के लिए दंड ।
65.कतिपय मामलों में बलात्संग के लिए दंड ।
66.पीड़िता की मृत्यु या सतत् विकृतशील दशा कारित करने के लिए दंड ।
67.पति द्वारा अपनी पत्नी के साथ पृथक्करण के दौरान मैथुन ।
68.प्राधिकार में किसी व्यक्ति द्वारा मैथुन ।
69.प्रवंचनापूर्ण साधनों, आदि का प्रयोग करके मैथुन ।
70.सामूहिक बलात्संग ।
71. पुनरावृत्तिकर्ता अपराधियों के लिए दंड ।
72.कतिपय अपराधों आदि से पीड़ित व्यक्ति की पहचान का प्रकटीकरण ।
73.अनुज्ञा के बिना न्यायालय की कार्यवाहियों से संबंधित किसी मामले का मुद्रण या प्रकाशन करना ।

महिला के विरुद्ध आपराधिक बल और हमले के विषय में

भारतीय न्याय (दूसरी) सहिंता 2023 खंड 74 से 79 तक महिला के विरुद्ध आपराधिक बल और हमले के विषय में प्रावधान किए गए है।

74.महिला की लज्जा भंग करने के आशय से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग ।
75. लैंगिक उत्पीडन ।
76. विवस्त्र करने के आशय से महिला पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग ।
77.दृश्यरतिकता।
78.पीछा करना ।
79.शब्द, अंगविक्षेप या कार्य, जो किसी महिला की लज्जा का अनादर करने के लिए आशयित है।

विवाह से संबंधित अपराधों के विषय में

भारतीय न्याय (दूसरी) सहिंता 2023 खंड 80 से 87 तक विवाह से संबंधित अपराधों के विषय में कानूनों का विवरण है। विवाह संबंधित सभी अपराधों को इसी भाग मे रखा गया है। जैसे खंड 80 में दहेज मृत्यु के लिए प्रावधान करती है।

80.दहेज मृत्यु ।
81.विधिपूर्ण विवाह का प्रवंचना से विश्वास उत्प्रेरित करने वाले पुरुष द्वारा कारित सहवास ।
82.पति या पत्नी के जीवनकाल में पुनः विवाह करना।
83.विधिपूर्ण विवाह के बिना कपटपूर्वक विवाह कर्म पूरा कर लेना ।
84.विवाहित महिला को आपराधिक आशय से फुसलाकर ले जाना, या ले जाना या निरुद्ध रखना ।
85.किसी महिला के पति या पति के नातेदार द्वारा उसके प्रति क्रूरता करना ।
86.क्रूरता की परिभाषा ।
87.विवाह आदि के करने को विवश करने के लिए किसी महिला को व्यपहत करना, अपहृत करना या उत्प्रेरित करना ।

गर्भपात, आदि कारित करने के विषय में

भारतीय न्याय (दूसरी) सहिंता 2023 खंड 88 के तहत गर्भपात कारित करना अपराध की श्रेणी में आता है। खंड 88 से 92 तक गर्भपात, आदि कारित करने के विषय में प्रावधान किए गए है।

88.गर्भपात कारित करना ।
89. महिला की सम्मति के बिना गर्भपात कारित करना।
90.गर्भपात कारित करने के आशय से किए गए कार्यों द्वारा कारित मृत्यु ।
91.बालक का जीवित पैदा होना रोकने या जन्म के पश्चात् उसकी मृत्यु कारित करने के आशय से किया गया कार्य ।
92.ऐसे कार्य द्वारा जो आपराधिक मानव वध की कोटि में आता है, किसी सजीव अजात बालक की मृत्यु कारित करना ।

बालक के विरुद्ध अपराधों के विषय में

समाज का एक घिनौना रूप ये भी है कि इसी समाज में मासूम बालकों के विरुद्ध अपराध कारित करने वाले रहते हैं। उन पर सिकंजा कसने के लिए खंड 93 से 99 तक बालक के विरुद्ध अपराधों के विषय में प्रावधान किए गए है।

93.बालक के पिता या माता या उसकी देखरेख रखने वाले व्यक्ति द्वारा बारह वर्ष से कम आयु के बालक का अरक्षित डाल दिया जाना और परित्याग ।
94.मृत शरीर के गुप्त व्ययन द्वारा जन्म छिपाना ।
95.अपराध को कारित करने के लिए बालक को भाडे पर लेना, नियोजित करना या नियुक्त करना ।
96. बालक का उपापन ।
97.दस वर्ष से कम आयु के बालक के शरीर पर से चोरी करने के आशय से उसका व्यपहरण या अपहरण
98.वेश्यावृत्ति आदि के प्रयोजन के लिए बालक को बेचना ।
99.वेश्यावृत्ति आदि के प्रयोजनों के लिए बालक को खरीदना ।

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